गुफ़्तगू में इश्क़ज़ादों को जताना हो गया
सिर्फ़ बातें बोलकर उनको ज़माना हो गया
ध्यान आया वक़्त का वो ही तक़ाज़ा हम-नशीं
साथ देखें ख़्वाब में तो आशियाना हो गया
आज तक इश्क़-ए-हक़ीक़ी के लिए हैरान थे
कब बहाराँ महज़ आया कब रवाना हो गया
सिर्फ़ पलकों पर बिठाया है तुझे ऐ हम सेफ़र
दोस्ती का ख़ास रिश्ता है बताना हो गया
'इश्क़ कर देता हमें भी दफ़'अतन बिस्मिल यहाँ
बीज बोया 'इश्क़ का फिर गुल खिलाना हो गया
दूर मंज़िल है मगर दिल में कशिश भी है तेरी
मसअला रूह-ए-रवाँ को अब जताना हो गया
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