चमकते शनै कब सितारे हुए हैं
अँधेरी गली फिर उजारे हुए हैं
जहाँ भी चलेंगे वहाँ साथ चलते
ग़म-ए-यार ही फिर सहारे हुए हैं
रहे अजनबी से कभी पास रहके
कई पल अकेले गुज़ारे हुए हैं
बुलाए अगर वो बयारे समुंदर
तुम्हारे लिए ही किनारे हुए हैं
दिखे जब हसीं सी तुम्हारी अदाएँ
तराशे हुए से नज़ारे हुए हैं
अधूरे 'मनोहर' नहीं हम कभी थे
मुकम्मल हुए फिर सितारे हुए हैं
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