दे रहा है कोई दस्तक या-ख़ुदा दर पर तेरे
काम होगा इसलिए आया वो भी घर पर तेरे
ज़िंदगी में कोई अपना क़द दिखाता है बड़ा
जान के सब क़र्ज़ क्यूँँ फिर कर लिया सर पर तेरे
ना-ख़ुदा को इल्म हो आते हुए तूफ़ान का
इसलिए माँझी भरोसा कर ले रहबर पर तेरे
ऐसे ही कैसे बसा ली एक दुनिया आँख में
देख लहरें ज़िंदगी की फिर समंदर पर तेरे
मतलबी तो चाल चलते हैं दरिंदों जैसे ही
ऐसे वैसे वास्तों से ही कटें हर पर तेरे
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