chand gaz kii shehriyat kis kaam kii | चंद गज़ की शहरियत किस काम की

  - Mehshar Afridi

चंद गज़ की शहरियत किस काम की
उड़ना आता है तो छत किस काम की

जब तुम्हें चेहरे बदलने का है शौक़
फिर तुम्हारी असलियत किस काम की

पूछने वाला नहीं कोई मिजाज़
इस क़दर भी ख़ैरियत किस काम की

हम भी कपड़ों को अगर तरजीह दें
फिर हमारी शख़्सियत किस काम की

  - Mehshar Afridi

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