हिम्मत की दाद है कि सर-ए-आम लिख गया
सब कुछ मिटा के सिर्फ़ लब-ए-जाम लिख गया
बिखरे जो मेरी राह में थे ख़ार बेशुमार
तरतीब मैंने दी तो तेरा नाम लिख गया
वो जाँचने लगे मेरी अच्छाई के सुबूत
सीने पे ख़ुद-ब-ख़ुद ही मेरे राम लिख गया
मुझ
में इमाम-ए-हिंद की अज़मत के हैं सुतूॅं
इस दम पे बन्दगी का ये अंजाम लिख गया
मौजूद है वो नित्य मेरे ख़ूँ में बा-ख़बर
ग़मगीनियाँ सभी वो मेरे नाम लिख गया
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