हम बहुत देर से सीखे हैं ग़ज़ल-गोई मियाँक़ाश आती ये जवानी में तो अच्छा होताज़ख़्म जो उस ने दिए हैं मैं उन्हें सी कर फिरडूबता उस की रवानी में तो अच्छा होता— Nityanand Vajpayee