हो गई शाम थोड़ी सी बासी
हम पे जँचने लगी है उदासी
इक ज़रा दुनिया में सारी दुनिया
सारी दुनिया में दुनिया ज़रा सी
मसअला है कोई जो ये बारिश
सुब्ह से बस बरसती है प्यासी
एक ही शख़्स से सारी उम्मीद
एक ही शख़्स वो भी सियासी
हम निभाए गए हिज्र-ए-आदाब
बे-हिसी बे-दिली बद-हवा सेी
— pankaj pundir















