yaar tum dil dukha rahi ho kya | यार तुम दिल दुखा रही हो क्या

  - Parvez Shaikh

यार तुम दिल दुखा रही हो क्या
बोल दो दूर जा रही हो क्या

यूँँ ख़मोशी मुझे दिखा कर तुम
ज़ुल्म पर ज़ुल्म ढह रही हो क्या

मेरी ग़ुर्बत को जान कर जानाँ
जान मुझ से छुड़ा रही हो क्या

दिल में ख़्वाहिश है दोस्ती की मगर
दुश्मनी तुम निभा रही हो क्या

रिज़्क़ अल्लाह दे रहा है हमें
बात उस की भुला रही हो क्या

क्या है 'परवेज़' की ख़ता ये बता
बे-सबब आज़मा रही हो क्या

  - Parvez Shaikh

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