सबके हिस्से में कोई शहज़ादी हो
जिससे प्रेम करें उससे ही शादी हो
एक मुक़दमा ऐसा भी आवश्यक है
जिस
में वादी ही अपना प्रतिवादी हो
हमको भी रोने की इच्छा होती है
हमको भी तो रोने की आज़ादी हो
गाँव घुमाने को दादा का कन्धा हो
और कहानी कहने को इक दादी हो
ऐसे गर आबाद हुए भी हम तो क्या
जिसके एवज़ में केवल बर्बादी हो
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