अब ये भी हौसला हम आज़मा के देखते हैं

इस चराग़-ए-दिल-ओ-जाँ को जला के देखते हैं

इस ज़माने की अदा हम को कभी आई नहीं
कैसे जाते हुए को मुस्कुरा के देखते हैं

आप के बा'द बस इक आप की तस्वीर रखी
जिसे सीने से हम अपने लगा के देखते हैं

ओढ़कर धूप जो ये बाद-ए-सबा आई है
दर-ओ-दीवार भी पर्दा हटा के देखते हैं

कोख से बस्तियों की एक धुआँ उठता है
रास्ते हाथ दुआ में उठा के देखते हैं

लहरों पर नाम लिखे आँधियों से दोस्ती की
लहरों को कश्तियों में जो सजा के देखते हैं

आप भी तीर चलाने का हुनर जारी रखे
हम भी अब अपना जिगर आज़मा के देखते हैं

— Raj Tiwari

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