गिराए बर्क़ रक्खे आश्ना तो क्या करिए
हमें बीमार ही कर दे दवा तो क्या करिए
बिछड़ के लोग जो ख़ुश हैं उन्हें अल्लाह रक्खे
हमें दिखता नहीं है आसरा तो क्या करिए
मेरे बच्चों न ताको इश्क़ में रस्ता मेरा
है जब ये उम्र भर का रास्ता तो क्या करिए
हमारे प्यार की क़स
में सभी खाएँ लेकिन
हमारे बीच में हो फ़ासला तो क्या करिए
दम-ए-आख़िर भी दीवाना तेरा दर छोड़ा नइँ
मुहब्बत आख़िरी हो फ़ैसला तो क्या करिए
वो मुझ को दिल की दहलीज़ें नहीं चढ़ने देता
न मुझ को कहता है वो अलविदा तो क्या करिए
मेरे मौला मुझे कुछ जीने की ख़्वाहिश दे दे
कहीं भी दिल नहीं रमता मेरा तो क्या करिए
हमें सच में मुहब्बत रास नइँ आती बाबा
चलो हम हैं अज़ल से बे-वफ़ा तो क्या करिए
मेरे नन्हें गुलाबों अब तुम्हारा क्या होगा
पयम्बर हो गया हो सरफिरा तो क्या करिए
ज़रूरी तो नहीं हर बन्दा इक ही जैसा हो
चलो शायर हुआ सब सेे जुदा तो क्या करिए
हमारे शे'र पढ़के तब्सिरा कर लो लोगों
हमें आती नहीं है रेख़्ता तो क्या करिए
क़यामत बा'द तुम सेे कौन बोलेगा 'राकेश'
ख़ुदा भी निकला जो तुम सेे ख़फ़ा तो क्या करिए
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