फूल के भेस में कुछ रंग उगाने के लिए
मैं ने चाहा तुझे ख़ुद-रंग बनाने के लिए
मैं ने कल रात दिवानों का भरम तोड़ दिया
हस्तियाँ लग गई हैं मुझ को मिटाने के लिए
बाग़बाँ बन के कई चोर भी आए हैं यहाँ
फूल की शाख़ पे तेज़ाब उड़ाने के लिए
कितना मजबूर हो के उसने निभाई है वफ़ा
आइना टूट गया बात बनाने के लिए
बे-वफ़ा है तो ये इक बात भी सुनती जा मेरी
तुझको इक शे'र ही काफ़ी है भुलाने के लिए
इस तरह आपका तो दोस्त भी खो जाएगा जी
लहजा कुछ नर्म रखें यार बनाने के लिए
कैसे कहते हो कि दुनिया में दया है ही नहीं
मैं ने देखा भी था इक शख़्स ज़माने के लिए
Read Full