mere ehsaas kii KHushboo se gar tu tar nahin saktaa | मेरे एहसास की ख़ुशबू से गर तू तर नहीं सकता

  - Rakesh Mahadiuree

मेरे एहसास की ख़ुशबू से गर तू तर नहीं सकता
तो जानाँ छू के भी मुझ को तू पागल कर नहीं सकता

तेरा लहजा बताता है तुझे कितनी मुहब्बत है
तू मुझ को मार सकता है तू मुझपे मर नहीं सकता

कहीं पे बैठ के तन्हाइयों में ख़ूब रोता है
जो बेटा बाप के बोझे को हल्का कर नहीं सकता

ग़ज़ल कहता हूँ और बारूद पे सिगरेट पीता हूँ
अगर भूचाल भी आ जाए तो मैं डर नहीं सकता

हमेशा मौत का खटका कि उसपे ये सितम भी है
बिना उस की इजाज़त के कोई भी मर नहीं सकता

बिताई उम्र है मैं ने जी ऐसे बे-वफ़ा के साथ
मैं जिस को मार नइँ सकता मैं जिसपे मर नहीं सकता

बड़े घर का नहीं मैं अपने घर का हूँ बड़ा बेटा
किसी की बे-वफ़ाई पर तो हरगिज़ मर नहीं सकता

जिसे इक बार तकने से मैं तर जाता था ऐ राकेश
मुझे वो मिल भी जाएगा तो मैं अब तर नहीं सकता

  - Rakesh Mahadiuree

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