ek pal ke li.e ya ek zamaane ke li.e | एक पल के लिए या एक ज़माने के लिए

  - Rakesh Mahadiuree

एक पल के लिए या एक ज़माने के लिए
प्यार झूठा न करो जान दिखाने के लिए

मैं ने माना कि मुहब्बत है ज़रूरत मेरी पर
तुम भी आए हो कभी आग बुझाने के लिए

ऐ मेरी उम्र के लड़कों ये हिदायत है तुम्हें
दिल से आगे भी चलो पेट चलाने के लिए

ऐ मेरी जान तुझे कौन सी आफ़त है अभी
हम कि ज़िन्दा हैं तेरे ख़्वाब सजाने के लिए

ऐ मेरी मौत मुझे आख़िरी मौक़ा दे दे
मैं ने सोचा है नए फूल खिलाने के लिए

अबकि यारों ने मुहब्बत का भरम तोड़ दिया
मैं ने चाहा था उन्हें ज़ख़्म दिखाने के लिए
इश्क़ ला-फ़ानी है इंसान कि फ़ानी है मगर
हमने दिल तोड़ दिया हाए ज़माने के लिए

ये ही दुनिया है जहाँ कितने ही सूरज थे उगे
प्यार के आख़िरी दीपक को बुझाने के लिए

वो भी क्या दिन थे वफ़ा जान पे बन आती थी और
अब तो दिल लगते हैं बस मौज़ उड़ाने के लिए

मैं ने रो कर कहा दिल क्यूँ मेरा तोड़ा तो कहे
मसअला चाहिए था रील बनाने के लिए

उनके कूचे में क़लम होते थे हर रोज़ ही दिल
दाव पे जान लगी यार कमाने के लिए

हमको राकेश कि दुनिया ने कहीं का न रखा
हम तो आए थे यहाँ प्यार लुटाने के लिए

  - Rakesh Mahadiuree

More by Rakesh Mahadiuree

As you were reading Shayari by Rakesh Mahadiuree

Similar Writers

our suggestion based on Rakesh Mahadiuree

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari