क़ातिलों के हाथ में ख़ंजर नहीं बनने दूँगा
हाथ बन जाएँगे लेकिन सर नहीं बनने दूँगा
तुम मुझे गर छोड़कर के ख़ुश हो तो फिर ख़ुश रहना
मैं पराए दिल को अपना घर नहीं बनने दूँगा
तू मुझे गर मार कर आगे बढ़े तो बढ़ लेकिन
ऐ मुसव्विर मैं तेरा पैकर नहीं बनने दूँगा
रात तारों से सजेगी चाहे वो जब भी चमके
जुगनुओं को राह का पत्थर नहीं बनने दूँगा
जाने कैसी-कैसी आँखें तुझको छूने आएँगी
मैं किसी दम पे अजाइब-घर नहीं बनने दूँगा
फूल से माली ने कल ये रोते-रोते कह डाला
ऐ कमाल-ए-शय तुझे बिस्तर नहीं बनने दूँगा
जो भी उस को देखने आया वो उस को माँगा था
इस कहानी में मैं जादूगर नहीं बनने दूँगा
मुझ को दुनिया-दारी का कुछ ठीक अन्दाज़ा नइँ है
पर मैं अपने दोस्त को शौहर नहीं बनने दूँगा
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