jab tumhaari mohabbat men kho jaayenge bigdi qismat bhi ik din sanwar jaayegi | जब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी

  - SALIM RAZA REWA

जब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी
लब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी

तुम मेरे साथ हो चाँदनी रात हो होंठ की बात हो ज़ुल्फ़ की बात हो
तब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी

हम नहीं चाँद तारे ये काली घटा ग़ुंचा-ओ-गुल ये बुलबुल ये महकी फ़ज़ा
सब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी

मैं गुनहगार हूँ मैं सियह-कार हूँ फिर भी रहम-ओ-करम पर यक़ीं है मुझे
जब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी

 
'उम्र भर दर-बदर हम भटकते रहे अब तलक प्यार का कुछ निशाँ तक नहीं

अब तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएँगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन सँवर जाएगी

  - SALIM RAZA REWA

More by SALIM RAZA REWA

As you were reading Shayari by SALIM RAZA REWA

Similar Writers

our suggestion based on SALIM RAZA REWA

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari