nashsha nahin suroor nahin be-khu | नश्शा नहीं सुरूर नहीं बे-ख़ुदी नहीं

  - SALIM RAZA REWA

नश्शा नहीं सुरूर नहीं बे-ख़ुदी नहीं
उसके बग़ैर ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी नहीं
 

वो क्या गया कि रौनक-ए-महफ़िल चली गई
जलते तो हैं चराग़ मगर रौशनी नहीं

चैन-ओ-सुकून भी गया होश-ओ-हवा से भी 

कैसे कहें कि उनकी ये जादूगरी नहीं 

राह-ए-वफ़ा में ठोकरें खा कर पता चला

मुझ में कमी है यार में कोई कमी नहीं


माँ बाप के ही दम से सभी का वजूद है 

उन सेे जहाँ में कोई भी शय क़ीमती नहीं

  - SALIM RAZA REWA

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