बूढ़ों से अनुभव बच्चों से दुआ लेते
'इश्क़ के उस्तादों से इल्म कमा लेते
इतने ही आतुर थे अगर झलक भर के
आँख बिछानी थी सो आँख बिछा लेते
कैसे आशिक़ हो जो आए ख़ाली हाथ
नज़र न मिल पाई तो हाथ मिला लेते
राज़ सभी खुलते हैं पीने के ही बाद
जाम पिलाने थे सो जाम पिला लेते
शौक़ अगर इतना था साथ में रखने का
तो बटुए में इक तस्वीर सजा लेते
As you were reading Shayari by Sandeep dabral 'sendy'
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