ये जितने भी लोग यहाँ क़िस्मत के मारे होते हैं
इनके हिस्से केवल आँसू और ख़सारे होते हैं
सूरज चाँद कहाँ होता इनकी क़िस्मत में यार यहाँ
इनके हिस्से में बस कुछ जुगनू और तारे होते हैं
बुझ जाते हैं कुछ दीए ज़िम्मेदारी के बोझ तले
बुझने से पहले वो दीए बेहद प्यारे होते हैं
उठ जाता है जिनके सर से माँ-बापू का साया वो
बच्चे दुनिया भर की नज़रों में बेचारे होते हैं
काम नमक का इनके आँसू ही कर देते हैं सैंडी
हमने देखा है आँसू बेहद ही खारे होते हैं
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