jee raha hooñ zindagi ik zindagi ke vaaste | जी रहा हूँ ज़िन्दगी इक ज़िन्दगी के वास्ते

  - Sandeep dabral 'sendy'

जी रहा हूँ ज़िन्दगी इक ज़िन्दगी के वास्ते
सह रहा हूँ मैं सितम याँ आशिक़ी के वास्ते

है इनायत ये ख़ुदा की जो मिली है ज़िन्दगी
ज़िन्दगी ये दी नहीं है ख़ुदकुशी के वास्ते

इस फ़रेबी ख़ल्क़ में तन्हा भरोसे-मंद वो
मैं लुटा दूँ अपना सब कुछ बंदगी के वास्ते

यार सादापन मुझे कायल जो उसका कर गया
दूर से खींचा चला मैं सादगी के वास्ते

वो मुझे गंगा सी पावन आपगा सी लगती है
मैं समंदर रूप धर लूँ उस नदी के वास्ते

  - Sandeep dabral 'sendy'

Zindagi Shayari

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