कारीगर पत्थर को पर न लगाते तो और क्या करते
अब उस की कोई मूरत न बनाते तो और क्या करते
सागर आस से माँगने आया था हम से पानी की भीख
यारों हम अपने आँसू न बहाते तो और क्या करते
याँ शमशीर अदू की उस के गले उतरने वाली थी
ग़र उस को याँ हम अपना न बताते तो और क्या करते
गाँव फ़क़त याँ रौशन हो सकता था हमारे ही घर से
आप बताओ अपना घर न जलाते तो और क्या करते
दीया जो तन्हा तम से लड़ रौशन कर रहा था घर को
हम उस दीए की बाती न बढ़ाते तो और क्या करते
— Sandeep dabral 'sendy'















