कारीगर पत्थर को पर न लगाते तो और क्या करते
अब उसकी कोई मूरत न बनाते तो और क्या करते
सागर आस से माँगने आया था हम सेे पानी की भीख
यारों हम अपने आँसू न बहाते तो और क्या करते
याँ शमशीर अदू की उसके गले उतरने वाली थी
ग़र उसको याँ हम अपना न बताते तो और क्या करते
गाँव फ़क़त याँ रौशन हो सकता था हमारे ही घर से
आप बताओ अपना घर न जलाते तो और क्या करते
दीया जो तन्हा तम से लड़ रौशन कर रहा था घर को
हम उस दीए की बाती न बढ़ाते तो और क्या करते
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