lehron men doobti kashtii ko bas kinaara yahaañ chahiye | लहरों में डूबती कश्ती को बस किनारा यहाँ चाहिए

  - Sandeep dabral 'sendy'

लहरों में डूबती कश्ती को बस किनारा यहाँ चाहिए
रंज में हर दफ़ा मशवरा नइँ सहारा यहाँ चाहिए

लौट वापस यहाँ आती मायूस चेहरों पे फिर रंगतें
खिलखिलाते लबों का फ़क़त इक इशारा यहाँ चाहिए

दान के बाद तस्वीर लेने का आया है जो ये रिवाज़
दानदाताओं को इक-अदद बे-सहारा यहाँ चाहिए

कितना अनमोल है पेड़ याँ जो लगाता है वो जानता
काटने वाले को तो फ़क़त एक आरा यहाँ चाहिए

कौन समझाए उसको कि पॉकेट में फूटी कौड़ी नहीं
दीन के तिफ़्ल को खेलने को ग़ुबारा यहाँ चाहिए

  - Sandeep dabral 'sendy'

Ishaara Shayari

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