इतना भी अब वक़्त नहीं है उस के पास
दो पल आ के बैठ सके वो मेरे पास
उस को पा कर के भी अब क्या करना है
वो जो ख़ुद को बाँट चुका है सबके पास
कुछ ऐसे हम व्यस्त हुए इस जीवन में
दूरी है अब उस से जो था सब से पास
ढूँढ़ रहा हूँ कोई लौटा दो आ कर
जाने ख़ुद को छोड़ दिया है किस के पास
इस धड़कन की बोली को समझा करता
काश कि कोई होता दिल के इतने पास
— Sarvjeet Singh















