sab samajhte hain ki ik bahta hua dariyaa hoon main | सब समझते हैं कि इक बहता हुआ दरिया हूॅं मैं

  - Shakir Dehlvi

सब समझते हैं कि इक बहता हुआ दरिया हूॅं मैं
ये फ़क़त मैं जानता हूॅं किस क़दर प्यासा हूॅं मैं

आज ख़ुद से बात की मैंने तो अंदाज़ा हुआ
इक दो कमियों के अलावा आदमी अच्छा हूॅं मैं

इक नई दुनिया बसा ली उसने मुझको छोड़ कर
जो ये कहता था कि उसके वास्ते दुनिया हूॅं मैं

दो घड़ी जब उस सेे मिलता हूॅं तो हो जाता हूॅं ख़ुश
बाद में उस सेे बिछड़ कर देर तक रोता हूॅं मैं

वक़्त दुनिया दोस्त दुश्मन राह मंज़िल हम सेफ़र
जाने किस किस से लड़ा हूॅं तब यहाँ पहुंचा हूॅं मैं

  - Shakir Dehlvi

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