आँखों ने जब ख़्वाब सजाना छोड़ दिया
धड़कन ने भी शोर मचाना छोड़ दिया
दोस्त भी अपने मन की ही अब करते हैं
हम ने भी अब नाज़ उठाना छोड़ दिया
कितने ख़्वाब सजा कर बैठी होगी वो
जिस लड़की ने आज ज़माना छोड़ दिया
दिल की गलियाँ तब से सूनी सूनी हैं
तुम ने जब से आना जाना छोड़ दिया
कुछ तकलीफ़ें जान की दुश्मन बन गईं हैं
साँसों ने अब बोझ उठाना छोड़ दिया
— shampa andaliib















