और मंज़र हसीन करते हो
तुम तो बिल्कुल चराग़ जैसे हो
क्या तुम्हें ये ख़बर नहीं है कि तुम
मेरे दिल के क़रीब रहते हो
मैं ने बोला था अब नहीं रहना
और तुम फिर उदास बैठे हो
मुझ को साहिल पे छोड़ने वालों
ये जो दरिया है पार कैसे हो
अजनबी शहर है यहाँ हम से
कौन पूछेगा आप कैसे हो
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