khud bhi hairaan hooñ kya se kya ho gaii | ख़ुद भी हैरान हूँ क्या से क्या हो गई

  - shampa andaliib

ख़ुद भी हैरान हूँ क्या से क्या हो गई
प्रेम में आप के राधिका हो गई

उस ने आ के सँभाला मुझे बारहा
जब कभी मैं अगर ग़म-ज़दा हो गई

जब भी राहों में तेरी अँधेरा हुआ
आगे आगे चली रास्ता हो गई

बोझ दिल का मेरे आज कुछ कम हुआ
आज पूरी मेरी इक दुआ हो गई

छोड़ कर जो गई शक्ल हँसती हुई
लौट कर आई तो लापता हो गई

मुब्तला इस तरह बंदगी में हुई
इस जहाँ से मैं बिल्कुल जुदा हो गई

मैं ने सोचा नहीं था कभी अंदलीब
मेरी क़िस्मत मगर बेवफ़ा हो गई

  - shampa andaliib

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