रौशनी कम हो रही है
ज़िंदगी कम हो रही है
और उलझन हैं जिगर में
शाइरी कम हो रही है
सब ही मतलब से जुड़े हैं
दोस्ती कम हो रही है
'उम्र बढ़ती जा रही है
आगही कम हो रही है
हर जगह अब शोर-ओ-गुल है
ख़ामुशी कम हो रही है
दिल बराबर जल रहा है
रौशनी कम हो रही है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by shampa andaliib
our suggestion based on shampa andaliib
As you were reading Bahana Shayari Shayari