हमारा दिल तो खंडर बन चुका है
यहाँ सब टूट कर बिखरा पड़ा है
मिरी आँखों में अब तक ताज़गी है
कोई चेहरा मिरे दिल में बसा है
न जाने क्यूँ उधर हम चल रहे हैं
अमूमन जिस तरफ़ जाना मना है
जहाँ तक चल सको चलते रहो बस
मोहब्बत एक लम्बा रास्ता है
अभी और रौशनी करनी पड़ेगी
अभी हम को बहुत कुछ देखना है
भँवर की सम्त कश्ती जा रही है
मगर बे-फ़िक्र फिर भी ना-ख़ुदा है
अभी तक डॉक्टर आया नहीं और
मरज़ दिन-रात बढ़ता जा रहा है
— shampa andaliib















