तुम्हारा नाम ले कर जी रहे हैं
अलग कुछ काम ले कर जी रहे हैं
कभी दिन ठीक से गुज़रा नहीं है
दिलों में शाम ले कर जी रहे हैं
अज़ल से रूह की पूरी मदद से
दिल-ए-नाकाम ले कर जी रहे हैं
हटाओ हाथ सर रक्खो जिगर पे
बहुत इल्ज़ाम ले कर जी रहे हैं
कभी तो देख कर लगता है ख़ुद को
कोई हम-नाम ले कर जी रहे हैं
हमारे दिल से क्या फूटेगा यारों
फ़क़त कोहराम ले कर जी रहे हैं
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