पहले सब को सलाम करते हैं
फिर कहीं पर क़याम करते हैं
कार-ए-दुनिया से मिलते ही फ़ुर्सत
अपने हिस्से का काम करते हैं
आप की आँखें हुक्म देती हैं
आप सीधे ग़ुलाम करते हैं
हम भी सब के क़रीब जाते नहीं
दूर से राम राम करते हैं
एक पर कैसे वो रहें मौक़ूफ़
जो सभी से कलाम करते हैं
— shampa andaliib















