hamaari aankhoñ ka kaajal baha kar | हमारी आँखों का काजल बहा कर

  - shampa andaliib

हमारी आँखों का काजल बहा कर
जो आया वो गया दिल को दुखा कर

हमारी कौन सुनता चल दिए सब
हमें तकलीफ़ फिर अपनी सुना कर

वो पंछी फिर दोबारा उड़ न पाए
किए आज़ाद जो क़ैदी बना कर

ख़ुशी बाँटो ख़ुशी से और सोचो
किसी को क्या मिला है दिल दुखा कर

अगर मुजरिम हो तो फिर जुर्म अपना
करो मंज़ूर अब सर को झुका कर

हमारी आँखें तो तकती रहीं पर
नहीं देखा किसी ने दूर जा कर

चलो भरते हैं ख़ालीपन ये शम्पा
दर-ओ-दीवार को बातें सुना कर

  - shampa andaliib

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