जब न आएँ नज़र हज़ारों में
ढूँढ लेना हमें सितारों में
ख़ैर तुम ने भी दिल दुखा ही दिया
तुम को रक्खा था ग़म-गुसारों में
तेरी तस्वीर ग़र्क़ होती है
रोज़ आँखों के आबशारों में
ना-ख़ुदा बढ़ चलो भँवर की सम्त
क्या ही रक्खा है इन किनारों में
इनकी आँखों में गौर से देखो
कितनी उजलत है बे-सहारों में
बाद मुद्दत के बाम पर आकर
खो गए आज चाँद तारों में
आज तो अंदलीब अपना भी
दिल नहीं लग रहा बहारों में
Read Full