कि बहलाना हँसाना तुमको नईं आता
मैं रोऊँ तो मनाना तुमको नईं आता
मेरी बारी में ही सब याद आता है?
यूँँ तो कोई बहाना तुमको नईं आता
मुझे तुम छीन लो मुझ सेे मेरी जाँ , क्या
भला यूँँ हक़ जताना तुमको नईं आता
कि बातें तो बहुत अच्छी बनाती हो
मगर खाना बनाना तुमको नईं आता
ये क्या के हाल अच्छा नईं मेरा इस बार
नया कोई बहाना तुमको नईं आता?
मोहब्बत तो 'करन' दिल से ही करते हो
सुना है पर बताना तुमको नईं आता
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