bhale jeena pade majboor ho ke | भले जीना पड़े मजबूर हो के

  - Shivang Tiwari

भले जीना पड़े मजबूर हो के
जिऊँगा मैं तेरा सिन्दूर हो के

तुम्हारे ख़्वाब शीशे की तरह हैं
बहुत चुभते हैं चकनाचूर हो के

मैं उसका रस्ता हूँ मंज़िल नहीं हूँ
मुझे भूलेगा वो मशहूर हो के

कहानी बनती उसके पास रह कर
ग़ज़ल बनती है उस सेे दूर हो के

तेरे जाने का ग़म क्या जा सकेगा
भरेगा ज़ख़्म क्या नासूर हो के

  - Shivang Tiwari

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