ab falak se to nahin koii yaa aane vaala | अब फ़लक से तो नहीं कोई याँ आने वाला

  - Sohil Barelvi

अब फ़लक से तो नहीं कोई याँ आने वाला
कोई टकराएगा शायद कि ज़माने वाला

जो नज़र फेर के बैठे हैं वही लोग हैं बस
और कोई नहीं दिल मेरा दुखाने वाला

रूठ कर जाते हुए लोग बहुत देखे मगर
अब तलक देखा नहीं नाज़ उठाने वाला

घर की रौनक़ भी नहीं देख सका घर आ कर
कितनी ख़ुशियों से है महरूम कमाने वाला

इसलिए भी मैं नहीं होता किसी से नाराज़
जानता हूँ कि नहीं कोई मनाने वाला

इस तरह ज़िंदगी इक रंग में ढाली अपनी
चढ़ नहीं पाया कभी रंग ज़माने वाला

दास्ताँ सुनता रहा बैठ के ग़म की दिल की
चारागर हम को मिला दर्द बढ़ाने वाला

जितने इल्ज़ाम हों सर आपके आ जाते हैं
ऐसा माहौल बना देता है जाने वाला

  - Sohil Barelvi

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