main apni kaifiyat se ab juda hooñ | मैं अपनी कैफ़ियत से अब जुदा हूँ

  - Sohil Barelvi

मैं अपनी कैफ़ियत से अब जुदा हूँ
उसे ख़ुश देख कर ख़ुश हो रहा हूँ

इधर मंज़िल नहीं है जानता हूँ
मगर फिर भी तिरी जानिब चला हूँ

मुझे पागल कहा करता था इक शख़्स
नहीं था कल तलक अब हो गया हूँ

ज़ियादा अब नहीं करता हूँ मन की
किसी को ग़ौर से सुनने लगा हूँ

कहीं पर दिल नहीं लगता है मेरा
तिरे पहलू में इक मुद्दत रहा हूँ

मिरे पीछे था जो आसेब मैं अब
उसी आसेब के पीछे पड़ा हूँ

मिरे हिस्से का सब कुछ लुट चुका है
मैं अब बर्बाद होने जा रहा हूँ

  - Sohil Barelvi

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