main tire baad kahaan jaaun bataa ja mujhko | मैं तिरे बाद कहाँ जाऊँ बता जा मुझको

  - Sohil Barelvi

मैं तिरे बाद कहाँ जाऊँ बता जा मुझको
अपनी आँखों पे भरोसा नहीं होता मुझको

मेरे अपनों ने कहीं का नहीं छोड़ा मुझको
अब किसी पर भी नहीं होता भरोसा मुझको

उस सफ़र पे भी मेरे हाथ लगी नाकामी
जो सफ़र दूर से कुछ ठीक लगा था मुझको

अपनी तक़लीफ़ पे होती हैं निगाहें सब की
क्या हुआ आज किसी ने जो न देखा मुझको

अपना समझा था तुझे भूल गया था दुनिया
अब तिरे बाद सताएगी ये दुनिया मुझको

तू ने दिल में तो जगह मुझ को कभी दी ही नहीं
तू समझता था फ़क़त भीड़ का हिस्सा मुझको

चंद लोगों से हुआ करती थी अनबन उस की
और वो इस का सबब आ के बताता मुझको

कैसे मतलब के थे वो लोग जिन्होंने 'सोहिल'
देखना चाहा नहीं फिर से दोबारा मुझको

  - Sohil Barelvi

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