जितना हो सकता है मैं रहता हूँ
और हाँ मैं ख़मोश अच्छा हूँ
दस्तकें दे रहे मुझे सब लोग
और मैं चुपचाप घर में बैठा हूँ
मुझ को अपनाए या नहीं ये शजर
मैं यहाँ पर नया परिंदा हूँ
ये जो बैठे हैं मतलबी अच्छे
इन से थोड़ा बहुत तो सच्चा हूँ
मौत आई नहीं हुआ एहसास
मैं ये समझा अभी मैं ज़िंदा हूँ
चार छह लोग जानते हैं मुझे
मैं बहुत कम किसी पे खुलता हूँ
ये अलग बात तू समझता नहीं
तेरी महफ़िल का मैं भी हिस्सा हूँ
क्यूँँ कि मैं भी नहीं बताऊँगा अब
कोई पूछे नहीं मैं कैसा हूँ
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