tujh ko is tarah kahaan chhod ke j | तुझ को इस तरह कहाँ छोड़ के जाना था हमें

  - Tariq Naeem

तुझ को इस तरह कहाँ छोड़ के जाना था हमें
वो तो इक अहद था और अहद निभाना था हमें

तुम तो उस पार खड़े थे तुम्हें मालूम कहाँ
कैसे दरिया के भँवर काट के आना था हमें

उन को ले आया था मंज़िल पे ज़माना लेकिन
हम चले ही थे कि दर-पेश ज़माना था हमें

वो जो इक बार उठा लाए थे हम उजलत में
फिर वही बार हर इक बार उठाना था हमें

वो तो ऐसा है कि मोहलत न मिली थी वर्ना
अपनी बर्बादी पे ख़ुद जश्न मनाना था हमें

  - Tariq Naeem

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