उस के कहने पे मोहब्बत से मुकर जाऊॅं
या'नी ज़िंदा भी रहूँ मैं और मर जाऊॅं
कोई तो आसार मिलने का नज़र आए
कुछ तो ऐसा हो कि फिर मैं उस के घर जाऊॅं
इक दफ़ा तो वो कहे मुझ से सुधरने का
मैं तो उस के इक इशारा पे सुधर जाऊॅं
कौन है उस के सिवा मेरा यहाँ पे दोस्त
रूठ कर उस से बता फिर मैं किधर जाऊॅं
— ABhishek Parashar















