vo guzra tha mere kuchh is qadar nazdeek se | वो गुज़रा था मेरे कुछ इस क़दर नज़दीक से

  - Viru Panwar

वो गुज़रा था मेरे कुछ इस क़दर नज़दीक से
कि उस को देख भी पाया नहीं मैं ठीक से

चराग़ों से सभी के हैं मकाँ रौशन यूँँ तो
मगर हैं ज़ेहन लोगों के यहाँ तारीक से

तेरे हर ताने से हम ने बना ली है ग़ज़ल
तुझे दी मात यानी तेरी ही तकनीक से

अगर करना है तुम को ज़िंदगी में कुछ अलग
तो चलना ही पड़ेगा फिर तो हट के लीक से

  - Viru Panwar

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