बहुत ही दूर था मुझ से किनारा तब कहाँ थे तुम
नहीं था तिनके का भी जब सहारा तब कहाँ थे तुम
जो मेरी नौकरी लगते ही ले के आए हो रिश्ता
मैं जब बेरोज़गारी से था हारा तब कहाँ थे तुम
किसी ने तुम को ठुकराया तो मेरे पास लौट आए
मगर जब मुंतज़िर था मैं तुम्हारा तब कहाँ थे तुम
मुझे शमशानों में अब इस तरह से ढूँढने वाले
मैं जब दुनिया में आया था दोबारा तब कहाँ थे तुम
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