यही था क्लास में झगड़ा हमारा
हो उस की बेंच पे बस्ता हमारा
कोई और कर गया है क़त्ल उस को
अधूरा रह गया बदला हमारा
नहीं करता कभी वो याद हम को
नहीं आता उसे सपना हमारा
यूँ तो था ख़ून का रिश्ता सभी से
मगर कोई न था अपना हमारा
जहाँ पे आज मयख़ाना बना है
वहाँ पे था कभी कमरा हमारा
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