जो पर्दादारी चली तो यारी नहीं चलेगी
हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी
हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी
तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे
फिर इस सड़क पर कोई सवारी नहीं चलेगी
परिंदे भी बे-घरी से पहले ये सोचते थे
कि सब्ज़ पेड़ों पे कोई आरी नहीं चलेगी
हम अपनी मर्ज़ी से उस के दिल में रहा करेंगे
हमारे घर में भी क्या हमारी नहीं चलेगी
तुम्हारी चीखों से वो दरीचा नहीं खुलेगा
बड़ी दुकानों पे रेज़गारी नहीं चलेगी
हुज़ूर-ए-वाला ये आशू मिश्रा का दिल है इसपर
हसीन चेहरों की होशियारी नहीं चलेगी
10
15 Likes
9
31 Likes
साथ में तू मेरे दो गाम तो चल सकता है
इतना चलने से मेरा काम तो चल सकता है
Read Fullइतना चलने से मेरा काम तो चल सकता है
8
37 Likes
जहाँ से आ गए हैं उस जहाँ की याद आती है
कि हम उर्यां-सरों को साएबाँ की याद आती है
कि हम उर्यां-सरों को साएबाँ की याद आती है
जहान-ए-महफ़िल-ए-शब में सभी आँखें भिगोतें हैं
सभी को अपने अपने रफ़्तगाँ की याद आती है
वहाँ जब तक रहे तब तक यहाँ की फ़िक्र रहती थी
यहाँ जब आ गए हैं तो वहाँ की याद आती है
ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम
कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
7
3 Likes
कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से
6
51 Likes
5
44 Likes
ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम
कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
4
117 Likes
पुरानी चाहत के ज़ख़्म अब तक भरे नहीं हैं
और एक लड़की पड़ी है पीछे बड़े जतन से
और एक लड़की पड़ी है पीछे बड़े जतन से
3
40 Likes
मैं इश्क़ कर रहा हूँ मगर सोचता भी हूँ
पिछले बरस जो हो चुका अब के बरस न हो
पिछले बरस जो हो चुका अब के बरस न हो
2
44 Likes
उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
1
74 Likes










