जो पर्दादारी चली तो यारी नहीं चलेगी
हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी
तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे
फिर इस सड़क पर कोई सवारी नहीं चलेगी
परिंदे भी बे-घरी से पहले ये सोचते थे
कि सब्ज़ पेड़ों पे कोई आरी नहीं चलेगी
हम अपनी मर्ज़ी से उसके दिल में रहा करेंगे
हमारे घर में भी क्या हमारी नहीं चलेगी
तुम्हारी चीखों से वो दरीचा नहीं खुलेगा
बड़ी दुकानों पे रेज़गारी नहीं चलेगी
हुज़ूर-ए-वाला ये आशू मिश्रा का दिल है इसपर
हसीन चेहरों की होशियारी नहीं चलेगी
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