मुझ को इतने से काम पे रख लो
जब भी सीने में झूलता लॉकेट
उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
सीधा करता रहूँ उस को
जब भी आवेज़ा उलझे बालों में
मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो
'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।'
जब ग़रारे में पाँव फँस जाए
या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके
इक नज़र देख लो तो काफ़ी है
'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है
लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा
मुझ को इतने से काम पे रख लो
Read Fullउल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
सीधा करता रहूँ उस को
जब भी आवेज़ा उलझे बालों में
मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो
'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।'
जब ग़रारे में पाँव फँस जाए
या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके
इक नज़र देख लो तो काफ़ी है
'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है
लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा
मुझ को इतने से काम पे रख लो
10
69 Likes
9
18 Likes
8
15 Likes
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिल में कुछ यूँ सँभालता हूँ ग़म
जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
पेड़ पर पक गया है फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई
देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई
7
7 Likes
2
37 Likes










