मुझ को इतने से काम पे रख लो
जब भी सीने में झूलता लॉकेट
उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
सीधा करता रहूँ उस को
जब भी आवेज़ा उलझे बालों में
मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो
'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।'
जब ग़रारे में पाँव फँस जाए
या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके
इक नज़र देख लो तो काफ़ी है
'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है
लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा
मुझ को इतने से काम पे रख लो
— Gulzar















