Gulzar
Gulzar
Nazm

मुझ को इतने से काम पे रख लो

जब भी सीने में झूलता लॉकेट
उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
सीधा करता रहूँ उस को

जब भी आवेज़ा उलझे बालों में
मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो
'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।'

जब ग़रारे में पाँव फँस जाए
या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके
इक नज़र देख लो तो काफ़ी है

'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है
लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा

मुझ को इतने से काम पे रख लो

— Gulzar

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