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तेरे बारे में जब सोचा नहीं था
मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था
मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था
तेरी तस्वीर से करता था बातें
मेरे कमरे में आईना नहीं था
समुंदर ने मुझे प्यासा ही रक्खा
मैं जब सहरा में था प्यासा नहीं था
मनाने रूठने के खेल में हम
बिछड़ जाएँगे ये सोचा नहीं था
सुना है बंद कर लीं उस ने आँखें
कई रातों से वो सोया नहीं था
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बिखरे बिखरे सह
में सह
में सह
में रोज़-ओ-शब देखेगा कौन
लोग तेरा जुर्म देखेंगे सबब देखेगा कौन
हाथ में सोने का कासा ले के आए हैं फ़क़ीर
इस नुमाइश में तिरा दस्त-ए-तलब देखेगा कौन
ला उठा तेशा चटानों से कोई चश्मा निकाल
सब यहाँ प्यासे हैं तेरे ख़ुश्क लब देखेगा कौन
दोस्तों की बे-ग़रज़ हम-दर्दियाँ थक जाएँगी
जिस्म पर इतनी ख़राशें हैं कि सब देखेगा कौन
शा'इरी में 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' के ज़माने अब कहाँ
शोहरतें जब इतनी सस्ती हों अदब देखेगा कौन
Read Fullलोग तेरा जुर्म देखेंगे सबब देखेगा कौन
हाथ में सोने का कासा ले के आए हैं फ़क़ीर
इस नुमाइश में तिरा दस्त-ए-तलब देखेगा कौन
ला उठा तेशा चटानों से कोई चश्मा निकाल
सब यहाँ प्यासे हैं तेरे ख़ुश्क लब देखेगा कौन
दोस्तों की बे-ग़रज़ हम-दर्दियाँ थक जाएँगी
जिस्म पर इतनी ख़राशें हैं कि सब देखेगा कौन
शा'इरी में 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' के ज़माने अब कहाँ
शोहरतें जब इतनी सस्ती हों अदब देखेगा कौन
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ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना
पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना
पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़-ए-सफ़र भी देना
गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूँगा था
अब मैं बोलूँगा तो बातों में असर भी देना
मैं तो इस ख़ाना-बदोशी में भी ख़ुश हूँ लेकिन
अगली नस्लें तो न भटकें उन्हें घर भी देना
ज़ुल्म और सब्र का ये खेल मुकम्मल हो जाए
उस को ख़ंजर जो दिया है मुझे सर भी देना
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