सुख ये जब आने का रस्ता देखता है
मेरे घर वो ग़म को ठहरा देखता है
वो मुझे अब देखता है इस तरह से
हाँ खिलौना जैसे बच्चा देखता है
ख़ुद ही को मैं तक रहा था ऐसे जैसे,
इक खिलौना ख़ुद को टूटा देखता है,
रूठता था जो किसी के छूने पे तब,
आज टूटा हूँ वो बैठा देखता है,
कहता है वो सब मेरे जैसे ही तो हैं
यार वो शीशे में शीशा देखता है
'इश्क़ हम जैसों का जाता है बड़े घर
सच है ये अब 'इश्क़ पैसा देखता है
इस नये रिश्ते को अब हाँ कर दे सौरभ
उसकी शादी तय है तू क्या देखता है
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