हमीं को याद करते हम हमीं को भूल जाते हम
पता अंजाम होता जो नहीं ख़ुद को सताते हम
मुहब्बत दी ज़माने को मुहब्बत के लिए तरसे
अगर होता यही मुमकिन गले ख़ुद को लगाते हम
हमारे आँसुओं से फ़र्क जो पड़ता अगर तुझको
लगे हैं घाव जो दिल पर तुझे फिर वो गिनाते हम
बहुत रोया करे हम भी मुहब्बत में तिरी जानाँ
मुहब्बत जो नहीं होती तुझे भी फिर रुलाते हम
अगर था तोड़ना दिल को इशारा तो किया होता
तुझे फिर बे-वफ़ाई का नया रस्ता बताते हम
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